➤ मंडी के बाबा भूतनाथ मंदिर में शिवरात्रि पर 11 रुद्री शिव मंदिर की झलक
➤ कैथल के ऐतिहासिक मंदिर की पौराणिक कथा का जीवंत रूपांकन
➤ महाभारत काल और अर्जुन की तपस्या से जुड़ा है मंदिर का गौरव
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध विश्वविख्यात बाबा भूतनाथ मंदिर, मंडी में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस बार एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिला। हरियाणा के कैथल में स्थित ऐतिहासिक 11 रुद्री शिव मंदिर के भव्य स्वरूप को यहां आकर्षक ढंग से उकेरा गया, जिसने श्रद्धालुओं को आस्था, इतिहास और भक्ति के अद्भुत संगम का अनुभव कराया।
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह महाभारत काल के गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के भीषण नरसंहार के बाद भगवान कृष्ण ने युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए स्वयं यहां 11 रुद्रों, यानी भगवान शिव के 11 स्वरूपों की स्थापना की थी और उनकी विधिवत पूजा-अर्चना की थी। इसी दिव्य परंपरा के कारण इस मंदिर को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है।
इस मंदिर की महिमा इतनी अधिक मानी जाती है कि इसी के कारण कैथल शहर को आज भी ‘छोटी काशी’ के नाम से जाना जाता है। यहां श्रद्धालु दूर-दूर से शिवभक्ति के लिए पहुंचते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंदिर का संबंध पांडु पुत्र अर्जुन से भी गहराई से जुड़ा है। कथा के अनुसार, अर्जुन ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और उन्हें अमोघ पाशुपतास्त्र प्रदान किया था। यह अस्त्र महाभारत युद्ध में अर्जुन के लिए निर्णायक सिद्ध हुआ।
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित 11 शिवलिंग इसे पूरे विश्व में अद्वितीय बनाते हैं। ये शिवलिंग भगवान शिव के विभिन्न रुद्र स्वरूपों का प्रतीक हैं, जिनकी पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है।
मंदिर की वास्तुकला भी अत्यंत आकर्षक है। इसकी दीवारों पर हनुमान, दुर्गा, विष्णु जैसे देवी-देवताओं के साथ-साथ प्राकृतिक दृश्यों और जीव-जंतुओं के सुंदर चित्र अंकित हैं। ये चित्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और कला की झलक भी प्रस्तुत करते हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंडी के बाबा भूतनाथ मंदिर में इस ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यह आयोजन शिव-शक्ति, कृष्ण भक्ति और भारतीय पौराणिक परंपरा का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। शिवरात्रि से एक माह पहले तारारात्रि पर मक्खन रूपी घृतकबंल चढ़ता है। शिवरात्रि के एक दिन पहले बाबा भूतनाथ अपने मूल स्वरूप में दिखाई देते हैं। एक माह तक देश भर के शक्तिपीठों को उकेरा जाता है। आज दूसरा दिन था।



